Annual Programme Jan 8,2012

समस्त वागड दिगम्बर जैन मन्डल, मुंबई दशा हुम्मड समाज के सद्स्यों को यह स्मारिका टेलिफोन निर्देशिका एवं वेबसाईट समर्पित करते हुए अत्यंत खुशी हो रही है। समाज ने मुझे यह प्रकाशन करने का दायित्व सौंपा परन्तु यह कार्य अकेले करना संभव नहीं होने से मैंने श्री दिनेश दोशी और महेन्द्र गोदावत के साथ मिलकर प्रकाशन समिति गठित की। हम तीनों सदस्य अपने पारिवारिक एवं व्यावसायिक व्य्स्तता के रहते हुए भी हमेशा इस कार्य के लिए सहयोग करते रहे।

आज के कम्प्युटर युग में समय की मांग को देखते हुए दुनिया के साथ कदम से कदम मिलाकर चलने के लिए अपने समाज की वेबसाईट बनाने का प्रस्ताव पिछले वर्ष श्री राजेन्द्र जैन एवं राहुल गांधी ने रखा था उन्होंने पूरी मेहनत और लगन से यह वेबसाईट तैयार कर समाज को समर्पित कर रहे है। संस्था २३ वे वर्ष में प्रवेश के साथ अपना यह सपना साकार करने जा रही है। निरंतर बदलाव व समय की मांग को देखते हुए मुबई स्थित वागड निवासी दशा हुम्मड समाज की स्मारिका टेलिफोन निर्देशिका प्रकाशित करने का निश्चय किया गया। आपके सामने प्रस्तुत इस पुस्तिका में हर परिवार के अनुसार परिवार के अन्य कार्यरत सदस्यों के ई-मेल आईडी एवं मोबाईल नंबर देने का प्रयास किया गया है। जो समाज के सदस्यों के लिए निश्चित ही उपयोग साबित होगा। हमारा उद्देश्य को आधुनिक युग के साथ एकजुट बनाये रखना है।

हमारे क्षेत्रीय प्रतिनिधियों एवं कार्यकर्ताओं द्वारा तथा अध्यक्ष महोदय श्री बाबुलालजी सरिया के द्वारा एकत्रित जानकारी एवं अथक प्रयास से हमारी यह कोशिश रही है कि इसमें सम्मिलित जानकारियां अधिक से अधिक सही हो, इसके बावजूद कोई कमी या त्रुटी रह गई हो तो क्षमाप्रार्थी है। इस संबंध में आपके सुझाव आमंत्रित है ताकि अगले प्रकाशन में उन सब बातों पर ध्यान दिया जा सके।

मैं आप सभी शुभचिंतको, विज्ञापन दाताओं, समाज के सदस्यों एवं विशेष रूप से इस प्रकाशन में जिन कार्यकर्ताओ ने सक्रिय सहयोग दिया उन सभी को अंतःकरण से हार्दिक धन्यवाद देता हुं। यह संस्करण आपके लिए अत्यंत उपयोगी एवं लाभप्रद होगा ऐसी आशा है।

हार्दिक शुभकामनाओं सहित जय जिनेन्द्र।

गोवाडिया ईश्वरचंद्र अमीचंदजी जैन

(संपादक - टेलिफोन स्मारिका समिति)

अध्यक्ष की कलम से

श्री वागड दि. जैन मण्डल, मुंबई के २३ वें वार्षिक स्नेह सम्मेलन में समाज की वेबसाईट क उद्घाटन व स्मारिका का विमोचन होने जा रहा है। मेरे अध्यक्षिय कार्य काल में यह दिन वास्तव में आत्मविभोर का है कि आप सभी के सद उपायो से ही यह महत्वपूर्ण कार्य होने जा रहा है।

यह वेबसाईट और स्मारिका टेक्नोलोजी व संचार क्रांती के इस युग में समाज के सदस्यों को एक सूत्र में पिरोने तथा परस्पर मेल-जोल स्थापित करने में सहायक सिद्ध गा एवं साथ में वागड प्रांत के परिवारों को भी जोडने का एक प्रयास होगा।

अर्थ के अभाव में समाज का कोई भी प्रतिभावान सदस्य शिक्षा से वंचित न रहें और कोई भी जरुरतमंद चिकित्सा से वंचित न रहे उसी लक्ष्य की प्रप्ति हेतु हमारे लिए परम सौभाग्य की बात है कि मण्डल के सभी सदस्यों द्वारा प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से संस्था के कोष में अपना योगदान दिया गया। इसी वर्ष श्रीमान आई.एस.जैन की प्रेरणा से मण्डल में एक केन्सर हेल्प सेन्टर की स्थापना की गई है। जो कि एक सराहनीय कदम है। आज के इसी सुअवसर पर समारोह अध्यक्ष श्रीमान बहदुरमलजी वगेरिय, मुख्य अतिथि श्रीमान वसन्त्लालजी किकावत, विशेष अतिथि संजयजी मिण्डा, दीप प्रज्वलनकर्ता श्रीमान मोहनलाल्जी जैन, वेबसाईट उद्घाटनकर्ता श्रीमान शान्तिलालजी जैन स्मारिका विमोचन कर्ता श्रीमान संजयजी वगेरिया का मैं मण्डल की तरफ से तहेदिल से हार्दिक अभीनन्दन करता हूं जिन्होने अपना अमूल्य समय निकालकर समारोह में उपस्थित होकर इस समारोह की शोभा बढाई।

उसी श्रुंखला में आज के प्रितिभोज के प्रायोजक श्रीमान भद्रेशजी, एवं तलवाडीया परिवार ह. निकुंज जैन व मनोरंजन कर्यक्रम के प्रायोजक जयन्तिलाल्जी छापिया क भी अभिनन्दन करता हुं।

मण्डल के भूतपूर्व अध्यक्षगण द्वारा समय समय पर मार्गदर्शन दिया गया उसके लिए मैं उनका बहुत आभारी हुं। निधी संग्रह समिति, वेबसाईट समिति व स्मारिका प्रकाशन समिति द्वारा अपनी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी निभाई गई इसके लिए समिति सदस्यों का मैं अभीनन्दन करता हूं। मण्डल की कार्यकारिणी के सदस्यों द्वारा इस कार्यक्रम को सफल बनाने में अथक प्रयास किया गया और निस्वार्थ सहयोग दिया गया उसके लिए सभी जन धन्यवाद के पात्र है।

संस्था के सभी सदस्यों को एकबार पुनः शुक्रिया अदा करना चाहता हूं जिन्होने १६-१-२०११ को मुझ पर विश्वास दिखाकर मण्डल के अध्यक्ष रूप में स्वीकार कर निरन्तर सहयोग दिय है।

अन्त में जिनेन्द्र भगवान से प्रार्थना करता हूं कि हमारा वागड दिग. जैन मण्डल निरन्तर प्रगति करता रहे व सभी सदस्यों के परिवार स्म्रुद्धीशाली बने एवं आनेवाला कल जीवन में ढेर सारी खुशीया और मुस्कुराहट लाये इन्हीं शुभकामनाओं के साथ।

जय जिनेन्द्र

बाबुलाल सरिया

(अध्यक्ष)

मंगल आशीर्वाद

श्री वागड जैन मण्डल, मुंबई ने समाज सेवा के क्षेत्र में जो कदम उठाए हैं, वह सराहनीय है। शिक्षा, चिकित्सा, आपसी सामंजस्य और युवा धार्मिक्ता के सम्बन्ध में समाज में बहुत काम की जरुरत है। आप लोग निरंतर इस खाई को कातने क उपक्रम जारी रखें।

आआचार्य श्री आदिसागरजी महाराज (अंकलीकर) के त्रुतीय पट्टाधीश तपस्वी सम्राट आचार्य श्री सन्मतिसागरजी गुरुदेव कहा करते थे कि प्रदर्शन के लिए लाखों दान (खर्च) करने से ज्यादा महत्वपूर्ण है, जरुरतमंद की सहायता करना। सभी कार्यकर्ताओं को नवीन उपलब्धियां हेतु शुभाशीष।

- आचार्य सुनीलसागर

मंगल आशीर्वाद

श्री वागड दिगम्बर जैन मण्डल अपने २३ वे वार्षीक स्नेह सम्मेलन में वेबसाईट का उद्घाटन व स्मारिका का विमोचन कर रही है।

सामाजिक परिवेष में जीवन की आवश्यकताएं है उनमें प्रमुख है समाज का पश्चिम शहरी जीवन में समाज बिखरे मोती के समान यत्र तत्र फैला रहता है। अतः यह प्रयास उन बिखरे मोतीयों को एकत्रित करना है। एवं वेबसाईट के माध्यम से धार्मिक व सामाजीक गतिविधीयों के बारे में समाज को जानकारी मिले।

इस कार्य के मंगल आशीर्वाद के साथ हम समाज के प्रति यह भावना भाते है कि देव शास्त्र गुरु के बनाए आदर्शो के अनुसार अपने जीवन को कर्तव्यशील - विवेकपूर्ण एवं सदाचार मय बनावें।

समाज के सदस्य देव पूजा, गुरु उपासना, स्वाध्याय आदि कर्तव्यों का पालन अपने जीवन में करें।

- आचार्य श्री १०८ वर्धमान सागरजी महाराज

उपाध्यक्ष का संबोधन

समस्त वागड दिगम्बर जैन मण्डल, मुंबई दशा हुम्मड समाज के सदस्यों को वेबसाईट व स्मारिका मण्डल द्वार प्रस्तुत करते हुए मुझे अत्यन्त प्रसन्नता हो रही है। सूचना और प्रौद्दोगिकी के इस युग में हम यदि तकनीकी विकास के साथ कदम से कदम मिलाकर आगे नहीं बढ सकते तो पिछड जायेंगे। इसी बात को ध्यान में रखते हुए हम इस वर्ष अपने सारे रिकार्ड अपनी वेब्साईट पर डाल रहे है ताकि यह ऑनलाईन सूचना का माध्यम बन सके।

सभी सदस्यों को उनका पासवर्ड दिया जाएगा और पासवर्ड का उपयोग करके वे अपने संबंधित जान्कारी को अद्दतन कर सकते है। इससे समाज के सभी सदस्यों को अद्दतन सूचनाओं का आदान प्रदान सरलता पूर्वक किया जा सकेगा। इस वर्ष हम एक स्मारिका भी प्रकाशित कर रहे है जिसमें विज्ञापन की दुनिया तो होगी ही, इसके अलावा हम सभी लोगों के बीच एक संपर्क सूत्र का भी कार्य करेगी।

आज के मोबाईल युग में हमारी वेबसाईट क उपयोग समाज के हित में होना आवश्यक है। अतः हम सभी क यह दायित्व है कि हम वेबसाईट पर अपने पते, मोबाईल नम्बर, टेलिफोन नम्बर एवं होनेवाले अन्य परिवर्तनों के बारे में सूचना दें। वैवाहिक संबंधो के लिए भी हम ऑनलाईन संपर्क कर सकते है।

हमारे क्षेत्रीय प्रतिनिधियों तथा कार्यकर्ताओं के अथक प्रयास से ही हमने यह जानकारी इकठ्ठा करते अपनी वेबसाईट पर डाला है। वेबसाईट पर हर परिवार के निवास, कार्यालय एवं मोबाईल नम्बरों को भी देने का प्रयास किया गया है। वेबसाईट का सबसे बडा लाभ यह होगा कि इसे सभी सदस्य एक साथ देख सकते है। अपने पासवर्ड क उपयोग करके इस्में हुई त्रुटियों को सुधार सकते है तथा भविष्य में होने वाले परिवर्तनों को अद्दतन कर सकते है।

अन्त में मैं आप सभी शुभचिंतकों, विज्ञापन दाताओं, समाज के सदस्यों एवं विशेष रूप से इस स्मारिका और हमारी वेबसाईट प्रारंभ करने मे जिन लोगों ने भी सक्रिय सहयोग दिया है उनको अन्तःकरण से हार्दिक धन्यवाद देता हूं। अपनी वेबसाईट मण्डल द्वारा समाज को समर्पित करते हुए मुझे अत्यन्त हर्ष हो रह है। मुझे पुरा विश्वास है कि यह तकनीकी संस्करण समाज के लिए उपयोगी एवं लाभप्रद होगा।

विनोद गोवाडिया

(उपाध्यक्ष)

आओ... एक नया संकल्प करें...

स्न् १९८९ के पूर्व हमारे मन में सामाजिक संगठन, एकता व अपनी पहचान की बात को लेकर एक वेदना थी, एक ग्लानी थी व एक व्यथा थी। पर आज यहां हर व्यक्ति के मानस पटल पर नया संकल्प, नया उत्साह व नई जाग्रुति का प्रत्यक्ष प्रतिदर्शन है। हमारे बुजुर्गों में शान्ति, सुकुन व सन्तोष है। तरुण व युवा पिढी में सुसंस्कार, शालीनता, गुणवत्ता व बुलन्द होंसले हैं। वही सक्रीय कार्यकर्ता अभूतपूर्व उत्साह से मंडल के प्रति जिम्मेदारी जवाबदेही व पूर्ण निष्ठा से समर्पित है।

जिससे मण्डल ने आज सुन्दर, सुव्यवस्थित, क्रम्बद्ध व समयबद्ध रचनात्मक गतिविधियों के माध्यम में अनेक उपलब्धियां हांसिल की है। आज मण्डल एक ऐतिहासिक व गौरवशाली मुकाम पर पहुंचा है। जहां हम टेलिफोन स्मारिका का प्रकाशन एवं वेबसाईट क उद्घाटन करने जा रहे हैं।

जहां आत्मा में द्रुढता हो, जहां विचारों में परिपूर्णता हो,
जहां मन में सन्तुष्टता हो, जहां बुद्धि में दुव्यता हो,
जहां संस्कारों में श्रेष्ठता हो, जहां द्रुष्टि में पवित्रता हो,
जहां वाणी में मधुरता हो, जहां स्नेह में शुद्धता हो,
जहां जीवन में मधुरता हो, जहां स्नेह में शुद्धता हो,
जहां जीवन में सत्यता हो, जहां आहार में सात्विकता हो।
इस प्रकार हम एक आदर्श, गौरवशाली और महान समाज की रचना करें

जहां हर मुंह से एक ही स्वर गुंजे,
सारे जहां से अच्छा यह वागड दि. जैन मण्डल हमारा
हम बुलबुले है इसके ये गुल सिता हमारा...
आओ हम रचनात्मक कार्यक्रम के माध्यम से, अपनी इस समाज में ऐस सुखद सार्थक व अनुकूल माहौल बनावें...

शांतिलाल टी. मईदावत

(कोषाध्यक्ष)

समारोह अध्यक्ष - श्री बहादुरमलजी जवाहरलालजी वगेरिया

श्री बहादुरमलजी जवाहरलालजी वगेरिया का जन्म पारसोला मे ता. २७-७-१९४९ को हुआ। प्रारंभिक शिक्षा पारसोला में ग्रहण करने के पश्चात, उदयपुर मेम उन्होने एम.कॉम. तक की शिक्षा ग्रहण की। १९७४ मे वे मुंबई आये और तब से उन्होने अपना निजी ट्रान्सपोर्ट का व्यवसाय जवाहर रोड लाईन्स के नाम से शुरु किया और आज उनकी कई ग्रुप कम्पनीयां है तथा उनका व्यवसाय ऊंचाई पर है। ट्रान्सपोर्ट के अलावा उनका प्रोपर्टी इन्वेस्टमेंट और फाईनान्स का काम है।

उनकी धर्मपत्नी श्रीमती शकुन्तला देवी अत्यंत धार्मिक एवं सरल स्वभाव की है। वे एक सफल एवं कुशल ग्रुहणी हैं। इनका बडा पुत्र श्री समीर वगेरिया है जो पेशे से सी.ए. है और उन्होने काफी कम समय में अन्तरराष्ट्रीय स्तर की प्रेक्टीस जमाई है। इनका दुसरा पुत्र श्री शीतल है जो कि ट्रान्सपोर्ट के अलावा प्रोपर्टी और फाईनान्स का काम सम्भालता है। इनकी पुत्री श्रीमती सारिका क ब्याह श्री दिलीपजी दोशी के पुत्र श्री दीपकजी अशोक ट्रान्सपोर्ट प्रतापगढ के यहां हुआ है।

श्री बहादुरमलजी वगेरिया श्री आदिनाथ दिगम्बर जैन मन्दिर ट्रस्ट नागरदास रोड अन्धेरी (पूर्व) के प्रमुख ट्र्स्टी है। उनका नेत्रुत्व अत्यन्त प्रभावशाली है। हाल ही मे उन्होने अन्धेरी पूर्व में एक प्रतिष्ठा महोत्सव मे अतुल्य योगदान कर महामंत्री रहे। इन पर १०८ प.पू. आचार्य श्री सुनिलसागरजी महाराज की असीम क्रुपा है। वे दिगम्बर जैन छात्रावास सोनगिर तीर्थ क्षेत्र के संरक्षक सदस्य है तथा अंधेरी व्यापारी संघ के पदाधिकारी है। समाज सेवा तथा धार्मिक आयोजन इनका स्वभाव है। आपने इस स्नेह सम्मेलन में पधारकर सम्मेलन की शोभा बढाई है, मण्डल आपका आभारी है।

विशेष अतिथि - श्री वसन्तलाल कीकावत

अत्यन्त साधारण आर्थिक परिस्थिति मे से स्व पुरुषार्थ से शनैः शनैः उठते हुए पुण्योदय से प्राप्त चंचला लक्ष्मी क धर्म, धर्मायतन व समाज के उत्थान में सतत् योगदान कर समाज के विश्वस्त आधार बने श्री वसंतलाल कीकावत, मुंबई का २३ नवम्बर १९३५ में राजस्थान के निठाउंवा जिला डूंगरपूर के छोटे से गांव में माता फुलीबाई की कोख से जन्म हुआ था। आपके पिता का नाम न्यालचंदजी था। वे अत्यन्त धार्मिक व भद्र थे। अनाज के थोक व्यापारी थे। आपके दो भाई थे। आप जब सात साल के थे तब माता का स्वर्गवास हुआ और ११ साल की उम्र मे पिता क स्वर्गवास हुआ।

अपने गांव में ही धार्मिक और लौकिक शिक्षा पायी। सन् १९४९ मुंबई में आए। सन् १९६२ तक नौकरी करते हुए जीवन बीताया। इस बीच सन् १९६० में ऋषभदेव के स्वर्गीय भट्टारक श्री यशकीर्तिजी की गृहस्थावस्था की भतीजी उषादेवी के साथ विवाह हुआ। व्यापार के साथ-साथ संसारिक जीवन को समृद्ध किया। सभी ने अच्छी सी लौकीक उच्च शिक्षा प्राप्त की है। सभी सुपुत्र आपके व्यापार, धार्मिक तथा सामाजिक कार्यों में आपका सहयोग कर रहे है।

सन् १९६३ में महावीर स्टोन एण्ड बिल्डींग मटेरियल सप्लायर्स के नाम से काम शुरु किया। मे. महावीर रोड्स ऍण्ड इन्फ्रास्ट्र्क्चर प्रा. लि. के नम से अब आपका यह कंपनी सरकार मान्य हो गई है।

बचपन से ही आप की धर्म व समाजसेवा मे भी रुची है। आप स्व. आचार्य श्री नेमीसागरजी महाराज से प्रभावित हुए सन् १९७९ में स्व. वात्सल्य रत्नाकर आचार्य श्री विमलसागरजी महाराज के नीरा (महाराष्ट्र) नगर में ससंघ दर्शन किये तब से उनका अनन्य आशिर्वाद आपको मिलता ही रहा है। तभी से आप बराबर मुनि संघो में आना जाना तथा आहार, विहार व जिनायतनों की उन्नति में योगदान दे रहे है।

मुंबई में अपने व्यापारिक क्षेत्र साकीनाका (अंधेरी) में सन् २००८ में एक शिखरबद्ध दिगम्बर जिनमंदिर का निर्माण स्व. वात्सल्य रत्नाकर आचार्य श्री विमलसागरजी महाराज के आशीर्वाद से भव्य पंचकल्याणक प्रतिष्ठा की गई।

स्म्मेदशिखर जी तीर्थराज पर स्व. वात्सल्य रत्नाकर आचार्य श्री विमलसागरजी महाराज ट्र्स्ट के संरक्षक के रुप में आप नियुक्त है। लुहारिया में अनेकांत गोम्मटगिरी निर्माण में आपका अनन्य योगदान है आप यहां ट्र्स्टी भी है। परम पू. आचार्य श्री भरतसागरजी महराज के आप अनन्य भक्त है। लुहारिया में भरत शिक्षा संस्थान के निर्माण में यहां भी आप संरक्षक है। श्री भट्टारक यशकीर्ति दिगम्बर संस्था केशरियाजी के आप ट्र्स्टी है।

दिगम्बर जैन समाज की सर्वाधिक प्राचीन संस्था श्री भारतवर्षीय दिगम्बर जैन महासभा के आप अनन्य सेवानिष्ठ प्रतिनिधी है। महासभा की मुंबई महानगर की शाखा के वर्तमान में आप अध्यक्ष है। भारतवर्षीय दि. जैन तीर्थ संरक्षिणी महासभा के आप संरक्षक है। भारतवर्षीय दि. जैन तीर्थक्षेत्र कमेटी मे भी आप परम सम्मानित सदस्य है। महासभा के मुखपत्र जैन गजट, जैन महिलादर्श में शिरोमणी संरक्षक है। श्री भारतवर्षीय दि. जैन धर्म संरक्षिणी महासभा चॅरिटेबल ट्र्स्ट के ट्र्स्टी तथा भारतवर्षीय दि. जैन श्रुत संवर्धनी महासभा मुंबई के आप उपाध्यक्ष है। सन् २००८ में आचार्य शान्तिसागर स्मारक ट्र्स्ट पोदनपुर, देव शास्त्र गुरु के समुन्नत विकास एवं सुरक्षा में आपका स्मरणीय योगदान हो रहा है।

आप अत्यन्त सरल भद्र परिणामी मृदुभाषी है। इस कारण समाज में आपका अच्छा सम्मान है। मुनिसंघो में समय समय पर पहुंचकर मुनिसेवा में तत्पर है।

आप समाज भूषण, दानवीर आदि पदों से सम्मानित हैं। जिनेन्द्र भगवान से प्रार्थना है कि आपका परिवार निरन्तर प्रगति करता रहे और आप हमारे समारोह में पधारे उसके लिए मण्डल आपका अभिनन्दन करता है।

मुख्य अतिथि - श्रीमान संजयजी मिण्डा

आज के हमारे सम्मेलन के मुख्य अतिथि श्रीमान संजयजी मिण्डा आप श्रीमान नथमलजी मिण्डा एवं श्रीमती कनकमाला मिण्डा के सुपुत्र है। आप सलुम्बर निवासी है।

आपका जन्म १५-८-१९६७ को हुआ आपकी धर्मपत्नि का नाम श्रीमती चेतनाजी है आपका सुपुत्र श्री सन्चेत मिण्डा है जो कि इस वर्ष १०वीं की परीक्षा है। और वो राष्ट्रीय चेम्पीयन हैं।

श्रीमान संजयजी एक धार्मिक परिवार से है आपके पिता श्री नथमलजी मिण्डा ने १२३४ महाव्रत बहुत ही कम समय करीब १० वर्ष के अन्दर ही पूर्ण कर दिया।

श्री संजयजी के माता व पिताजी ७ वीं प्रतीमाधारी है और पूरी तरह धर्म ध्यान में अपना अधिक से अधिक समय बितातें है। आपका परिवार मुनि भक्त है।

श्रीमान संजयजी व उनकी धर्मपत्नि चेतनाजी दोनों ने १०-१० उपवास किये है।

श्रीमान संजयजी के तीन भाई व तीन बहनें है। आपने मुंबई आकर सी.ए. की डीग्री हांसील की और आप अपना खुद क सी.ए. का प्रोफेशन चलाते है। इस २३ वे स्नेह सम्मेलन में पधारकर सम्मेलन की शोभा बढाई इसके लिए मण्डल आपका आभारी है।

- जय जिनेन्द्र

वेबसाईट उद्घाटन कर्ता - श्रीमान शांतिलालजी जैन (वेलावत)

श्री वागड दि. जैन मण्डल की वेबसाईट के उद्घाटनकर्ता श्रीमान शांतिलालजी जैन (वेलावत) का जन्म १-३-१९५९ को श्रीमान गमेरलालजी वेलावत और श्रीमती पूंजीबाई वेलावत के सुपुत्र के रुप में उदयपुर जिले के सवीना ग्राम में हुआ।

आप एक धार्मिक व समाजसेवी परिवार से है आपकी माताश्रीने तीनबार मासोपवास किये है।

आपकी धर्मपत्नी का नाम सुशीलादेवी जैन है। आपके दो सुपुत्र श्री दिनेश व कमलेश जैन है। आपकी सुपुत्री श्रीमती मीनाक्षी कोठारी है।

आपका एक चेरीटेबल ट्र्स्ट श्री गमेरमलजी पुंजीबाई वेलावत ट्र्स्ट के नाम से है। जिसके माध्यम से मानव मात्र के लिए विभिन्न सहायता योजनाऍ चलती है। जिसके अंतर्गत गरीब परिवारों को राशन व्यवस्था, पशु के लिए चारा व पानी, जरुरतमंद व्यक्ति के लिए शिक्षा व चिकित्सा सहायता दी जाती है।

आपने समाज को ७०००० वर्ग फीट जगह देकर उसकी विकास योजना प्रारंभ की। आप मुनिभक्त भी है, समय समय पर साधु साध्वीगण के लिए आहार व विहार में सहायता देते है।

आपका मुख्य व्यवसाय प्रोपर्टी व बिल्डींग का है, आप अपना मीनाक्षी प्रोपर्टी डीलर के नाम से व्यवसाय करते है और सभी को प्रोत्साहित भी करते है व्यवसाय में स्वच्छ छबी व इमानदारी के कारण आपने पहचान बनाई है।

विशेष - जैन युवा परिषद, उदयपुर द्वारा समाज रत्न की उपाधी वर्ष २००० में एवं महावीर युवा मंच संस्थान उदयपुर द्वारा भामशाह उपाधी वर्ष २००३ में

आपने हमारे इस २३ वें समारोह में पधारकर वागड दि. जैन मण्डल को अनुग्रहित किया है, जिनेन्द्र भगवान के आपकी निरन्तर सफलता की कामना करते है।

दीप प्रज्वलनकर्ता - श्रीमान मोहनलाल जी जैन

नाम         - मोहनलाल जैन (पिण्डारमिया)

पिता         - स्व. छगनलालजी जैन

माता         - श्रीमती केशर बाई

पत्नी         - श्रीमती मिनाक्षी देवी

परिवार       - ६ भाई, ३ बहने, पुत्र, पुत्रवधु, पोतो, पोती, का भरापूरा परिवार, एक परिसार में ६ भाईयों का आवास, व्यवसाय की दृष्टी से संयुक्त परिवार। परिवार में आपसी सामंजस्य, स्नेह एवं सहयोग मोहनलाल सबसे बडे, सभी छोटे भाई बडे भाई के निर्देशो का पालन एवं सम्मान करने वाले

मूल निवासी  - नौगामा ता. बागीदौरा जि. बाँसवाड़ा

हाल मुकाम   - पुष्पकुंज, आदिनाथ कॉलोनी, परतापुर

वर्तमान पद    - अध्यक्ष, श्री अठारह हजार दशा हुम्मड साढे बारह मंदिर बंदीजी एवं चौखला संबंधी दिगम्बर जैन स्माज

                - उपाध्यक्ष, फेडरेशन ऑफ दशा हुम्मड दिगम्बर जैन समाज

व्यवसाय       - अनाज, ट्रान्सपोर्ट एवं प्रोपर्टी के प्रमुख व्यवसायी

विशेष          - समस्त साधु संतो के परम भक्त, दानवीर, विनम्र, दयालू, सकारात्मक विचारधारा व सहयोग की भावना

                - आदिनाथ कॉलोनी परतापुर में श्री १००८ आदिनाथ दिगम्बर जैन मंदिर क भव्य एवं कलात्मक निर्माण में संपूर्ण परिवार क तन, मन एवं धन से सहयोग

                - वागवर स्म्मेद शिखर नौगामा एवं श्री आदिनाथ दिगम्बर जैन मंदिर, आदिनाथ कॉलोनी, परतापुर के पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव में सौधर्म इन्द्र का पूण्यार्जन

आज के इस समारोह में वागड प्रान्त से यहाँ मुंबई में आप पधारे उसके लिए मण्डल में बहुत खुशी हुई है, आशा करते है कि आप वागड प्रान्त को नई उंचाईयों पर पहुंचायेंगे साथ में आपके प्रगतिशील भविष्य एवं सम्पन्नता के लिए जिनेन्द्र भगवान से अर्चना करते है।

स्मारक विमोचनकर्ता - श्रीमान संजयजी वगेरिया

राजस्थान के पारसोला गांव के निवासी श्री सागरमलजी वगेरिया एवं श्रीमती गुणमाला वगेरिया के सुपुत्र श्री संजय वगेरिया क जन्म २४ जुन १९६६ को उदयपुर मे हुआ, आपने १०वीं तक शिक्षा पारसोला मे तथा उच्च शिक्षा बी.कॉम. एल.एल.बी. की डीग्री मुंबई में हासिल की।

धैर्यवान, संयमशील, हँसमुख स्बभाव के संजयजी प्रसिद्ध उद्दोगपती एवं सामाजिक कार्यकर्ता है। आप विगत १५-२० वर्षों से रियल एस्टेट कन्सलटेन्ट, इनवेस्टमेन्ट एडवाईजर एवं भवन निर्माता के रुप में कार्यरत है आपकी ख्याती प्रप्त विज्ञापन एजन्सी भी है। आपकी पत्नी श्रीमती क्षीतीजा जो कि वर्तमान में अंधेरी जिन मंदिर के ब्राह्मीसुंदरी महिला मण्डल की अध्यक्ष के रूप में कार्यरत है। आपकी ज्येष्ठ पुत्री सुश्री कोमल मुंबई के सौमेया कॉलेज में इन्जीनीयरींग की पढाई कर रही है, तथा छोटा पुत्र सुयश मीठीबाई कॉलेज में १२वी (साईन्स) की पढाई कर रहा है।

वर्तमान में आप आदिनाथ दिगम्बार जैन मंदिर अंधेरी के ट्र्स्टी है एवं वर्तमान में शान्तीनाथ दिगम्बार जैन मंदिर निर्माण एवं पंचकल्याणक प्रतिष्ठा में अपना तन, मन, धन से सहयोग दिया। चेरिटेबल संस्थाओं एवं आयन्स क्लब आदि से जुडे हुए है।

आपको २०१० में सेन्टर फॉर एज्युकेशन डेवलपमेन्ट रिसर्च एस्टेट में राष्ट्रीय उद्दोग रत्न अवार्ड से सम्मानित किया गया था।

अलग अलग संप्रदाय मे रहकर जैन धर्म का प्रचार करना अहिंसात्मक जीवन जीना, जैन दिगम्बर साधुओं की वैयावृत्ति मे आनन्द मानना, सम्पुर्ण भारत मे सभी जैन तीर्थो की वन्दना करना या करवाना आपने जीवन के अनमोल समय को व्यर्थ न गवाते हुए हमेशा सामाजिक सेवा तथा पारिवारीक जिम्मेदारीयों को निभाना अपना परम कर्तव्य समझते है। वागड दिगम्बर जैन समाज आपके प्रत्येक क्षेत्र की बुलन्दी प्रप्त हो इसी कामना करते है।

स्वरुची भोज के सहप्रायोजक - श्रीमान तलवाडीया परिवार

स्व. श्रीमान चम्पालालजी के सुपुत्र श्रीमान गेंदमलजी, श्रीमान कल्याणमलजी, व श्रीमान पारसमलजी है आप वागड प्रांत के नरवाली गांव के है।

सम्पूर्ण वागड प्रांत मे आपका परिवार मुनिभक्त, धर्मप्रेमी, व समाज सेवी के रूप में उभरा है। श्रीमान पारसमलजी व गेन्दमलजी नरवाली में अपना व्यवसाय करते है श्रीमान कल्याणमलजी का परिवार मुंबई में है। कल्याणमलजी जैन चार्टर्ड एकाउन्टन्ट के प्रोफेशन में है। कल्याणमलजी व हंसाजी क पुत्र श्री निकुंज जैन है उन्होने भी सी.ए. सी.एस. एवं एल.एल.बी. की उच्च डीग्री हांसिल की है। और अपने पिताजी के फर्म कल्याण जैन एंड कं. में पार्टनर है। श्री निकुंज जैन की बहन विधी जैन जो अभी १० वीं की पढाई कर रही है। श्रीमान निकुंज जैन अपने परिवार की गरीमा के अनुसार, धार्मिक एवं सामजिक गतिविधीयों मे अपने तन मन धन से सहयोग देते है। श्रीमान निकुंज जैन क जन्म ३१-८-१९८७ को हुआ है। इन्होने छोटी ही उम्र मे अपने प्रोफेशन काफी कुशलता से विकसित किया है।

तलवाडिया परिवार साधुसन्तों के आहार विहार में पूरी तरह से सहायता करता है और पुरा परिवार साधु संतों की भक्ती व वैयावृत्ति में निरंतर समय देता है विशेष रूप से आचार्य श्री १०८ सन्मतिसागरजी महाराज के संघ जिसके वर्तमान मे आचार्य १०८ श्री सुनीलसागरजी महाराज पट्टाधीश है। इस संघ में आहार व्यवस्था मेम सहभागी है।

श्रीमान कल्याणमलजी जैन कई सामाजिक एवं धार्मीक संस्थाओं में अग्रणीय रूप से जुडे है। जिसमें आचार्य श्री १०८ आदिसागर (अंकलीकर) जागृति मंच प्रमुख है।

जिनेन्द्र भगवान से प्रार्थना करते है कि तलवाडिया परिवार इस तरह समाज व धर्म मे अपना तन मन धन से सहयोग देता रहे और समृद्धशाली बना रहे।

भोजन सह प्रायोजक - श्रीमान भद्रेश राजेशजी शाह

श्री वागड दि. जैन मण्डल, मुंबई के २३ वे वार्षीक स्नेह सम्मेलन के भोजन के सहप्रायोजक श्रीमान भद्रेश जी शाह, मुल नि. डुंगरपुर के हैं आप श्रीमान राजेशजी व श्रीमती विमलादेवी के सुपुत्र है, आपका जन्म २४-८-१९७७ को हुआ आपकी धर्मपत्नी श्रीमती मोना शाह है मास्टर कृष और कुमारी मेहल नामक आपके सुपुत्र व सुपुत्री है। आप एक धार्मीक सामाजीक परिवार से जाने जाते है। छोटी ही उम्र में आपने अपने व्यवसाय को बहुत विकसीत किया है आपकी एक फर्म टुडे डेवलपर्स सी.बी.डी. बेलापुर, नवी मुंबई में है।

आपका मुख्य व्यवसाय बील्डींग व रीयल एस्टेट का है। और आपका व्यवसाय पूर्णतया प्रगतिशील है।

आपने मण्डल के २३ वें सम्मेलन में भोजन सहप्रायोजक बनकर समाज को अच्छा योगदान दिया है, आपका परिवार सुखमय व समृद्धि शाली हो यही कामना जिनेन्द्र भगवान से करते है।

मनोरंजन कार्यक्रम के प्रायोजक - श्रीमान जयन्तिलालजी छापिया

श्रीमान जयन्तिलालजी छापिया, श्रीमान मोतीलालजी छापिया निवासी विजयनगर के सुपुत्र है। आपकी धर्मपत्नी खुशबु छापिया है। आपके सुपुत्र संकेत व जिमित छापिय है। संकेत छापिया ने एम.बी.ए. (फाईनान्स) किया है और सर्विस करते है। जिमित छापिय बी.ई. (इलेक्ट्रोनीक्स) किया है और ऑक्टोपस सिस्टम प्रा.ली. में सर्विस करते है।

आपका पूरा परिवार धार्मिक एवं सामाजिक गतिविधीयों से जुडा है। आप अपनी निजी व्यवसाय करते है मण्डल आपके परिवार की समृद्धि व प्रगति की कामना करता है। मण्डल में आपके द्वारा किया गया योगदान सराहनीय है।

संस्थापक के दो शब्द...

इस मायावी नगरी मुंबई में धनोपार्जित करने हेतु आये हुए हमार बंधु-भगीनीओं ने अपने प्रांत-मित्र-संबंधीयों को अपने पास बुलाकर जरुरी आजिवीका के साधन उपलब्ध कराये; नो किसीने अपने बलबुते पर स्वयं ही रोज्गार एवं व्यवसाय का शुभारंभ किय और आज हमारे वागड प्रांत के करीब करीब मुंबई में ही ३२५ से भी अधिक परिवार अलग अलग जगह पर रहते है। आज से २३ साल पहले दि. ३-४-१९८९ को गुडी पाडवा के दिन दो सहयोजीयों से मिलकर मैंने श्री वागड दिगम्बर जैन मण्डल की स्थापना की। समाज के साथ चलते चलते मैने आप सभी के सहयोग से कई कार्यक्र्मों का सफल आयोजन किया है और आगे भी समाज के कार्यकर्ता करते रहेंगे। अभी तक सभी कार्यकारिणी के पदाधिकारी एवं कार्यकर्ताओंने अपनी समझदारी एवं कार्यकुशलता से मण्डलकी समृद्धि एवं प्रगती के लिए समाज सेवा के कई आयोजन करते रहे। आज संस्था ने मूंबई महानगर मे अपनी पहचान बनायी। संस्था के पदाधिकारी अन्य जैन संस्था के पदाधिकारीगण को भी वार्षिक स्नेह सम्मेलन में विशेष रूप से आमंत्रित करते है। मैं समाज का कृतार्थ हुं कि समाज ने मुझे समय समय पर सेवा का अबसर दिया।

आज के कम्प्युटर युग में समय की मांग को देखते हुए दुनिया के साथ कदम से कदम मिलाकर चलने के लिए अपने समाज की एक वेबसाईट बनाने का प्रस्ताव पिछले साल रखा था। संस्था इस वर्ष २३ वे वर्ष में प्रवेश के साथ अपना यह सपना साकार करने जा रही है। वेबसाईट का उद्देश्य समाज को आधुनिक युग के साथ एक्जुट बनाये रखना है। हम सभी महानुभावों से एक बार पुनः अनुरोध करते है कि आप अपना सक्रिय योगदान अवश्य दें।

पिछले कई वर्षों से वागड क्षेत्र के छात्रों को प्रति वर्ष प्रोत्साहन हेतु आर्थिक अनुदान सहयोग देकर प्रोत्साहित करते है एवं गत वर्ष से केन्सर जैसी भयानक बीमारी के लिए विशेष सेल का प्रारंभ हुआ है।

गोवाडिया ईश्वरचंद्र अमीचंदजी जैन

(संस्थापक, भू. अध्यक्ष एवं सलाहकार)

Next entry

Previous entry

Similar entries

Comments

Comments are closed.

Pingbacks

Pingbacks are closed.