Dharmik Yatra

 
 
प्यारे वागड़ वासियों आपको मेरा जय जिनेन्द्र .......
आज में हमारे साल २०११ की तीर्थ यात्रा के बारे में विस्तृत जानकारी उन मेम्बर्स को देंना चाहूँगा जो अपने व्यस्तता  के कारण , हमारे साथ यात्रा में नहीं आ सके.
 मुझे अकेले  संबोधित करना पड रहा हे , कारण  मेरे सहपाठी पंकज जी दोषी अपने व्यस्तता के कारण हमारे साथ यात्रा में नहीं आ सके लेकिन उनका सहयोग  हमेशा बना रहा .
यह तो आप सभी को मालूम है की पिछले १३ वर्षो से हम धार्मिक यात्रा का आनंद ले रहे हे , जिसमे १९९८ में औरंगाबाद, पैठान ,कचनेर एलोरा , १९९९ में कुम्भोज बाहुबली ,२००० में मांगी तुंगी, २००१ में सम्मेद शिखर  व् पञ्च तीर्थ,२००२ में मुक्तागिरी ,२००३ में कुंथाल्गिरी ,२००४ में मक्षी पार्श्वनाथ ,सिद्ध कुठ ,इंदौर, २००५ में पवागड़,महुआ पार्श्वनाथ, २००६ में कुम्भोज एवं कुंथुगिरी,२००७ में वापस पैठान , कचनेर, एलोरा ,२००९ में जिन्तुर , परभानी, २०१० में मांगी तुंगी एवं गजपंथा, तथा इस साल २०११ में हम महावीरजी, तिजारजी, पदमपुरा गए , जिसका विवरण इस प्रकार है.:- 
हमारी यात्रा की तेयारी हम पिछले ४  महीने से कर रहे थे , जिसमे ट्रेन की टिकेट बुकिंग एवं बस तथा धर्मशाला की बुकिंग सभी शामिल थे. में धन्यवाद करता हु  श्रीमान निलेश जी दोषी, मनीष जी कोठारी, एवं आशीष जी कोठारी का जिन्होंने यात्रा के दोरान भोजन व्यवस्था को स्पोंसर किया  एवं तहेदिल से सभी का स्वागत किया.
यात्रा २७ नवेम्बर को मुंबई से  शुरू होकर, २८ को महावीरजी, २९ को तिजाराजी, ३० को पदाम्प्रभु जी एवं ३१ को जयपुर से मुंबई होकर सम्पूर्ण हुई. इसका विवरण आपको अपनी वेबसाइट पर मिलेगा.
में एक बार फिर आपसे वादा कर्ता हूँ की अगले साल इससे भी बड़ी धार्मिक यात्रा का आयोजन होगा , और हम सभी धार्मिक रूप से लाभान्वित होंगे.
मेरी आप सभी से यही विनंती करता हु की धार्मिक यात्रा में बढ चड़कर भाग ले एवं सहयोग करे.
कृपया आपके सुजाव हमें  svdjm.mumbai@gmail.com पर ईमेल  करे.
 
 
जय जिनेन्द्र 
 
 
राजेंद्र आर जैन.
एवं पंकज दोषी
 
विवरण-
हम २७ नवम्बर की शाम ९.४५ बॉम्बे सेंट्रल से गोल्डेन टेम्पले ट्रेन से रवाना होकर २८ नवम्बर की दोपहर २ बजे श्री महावीरजी पहुंचे और इस बिच हमने ट्रेन में सुबह का नास्ता तथा दोपहर का भोजन ट्रेन में ही यात्री गानों को उपलब्ध कराया और ट्रेन में ही गाते जूमते महावीरजी पहुँच गए.
महावीरजी पहुँचते ही हमने त्यागी भवन  धर्मशाला में प्रवेश किया, जंहा बड़े बड़े हाल में एक साथ ३-४ परिवार एक साथ आराम से रह सकते थे , सभी ने स्नान आदि कर जल पान कर आराम किया , फिर शाम ५.३० बजे भोजन कर सभी एक साथ मंदिरजी में दर्शन करके आरती की, जिससे सबकी थकान गायब हो गयी. बड़ी अछी बात यह थी की सभी ने भजन, आरती में नृत्य करके आनंद लिया जो अविस्मरनीय था.
फिर रात को वापस धर्मशाला में पहुँचने के बाद थोड़ी सी गप-शाप के बाद सभी ने एक दुसरे को शुभ रात्रि एवं जय जिनेन्द्र संबोधित किया.
दुसरे दिन २९ नवम्बर  सुबह बड़े मंदिर में सभी ने भागवान जी अभिषेक किया  तथा पूजा पाठ की, जो वास्तव में यादगार था , सबसे बड़ी बात आज के यंग ब्लूड ने बढ-चड़कर भाग लिया.
फिर हमने ९ बजे अल्पाहार कर दुसरे मंदिरों के दर्शन करने गए जिसमे कांच मंदिर भी शामिल था , हाँ वह ऊंट गाडी सवारी शानदार थी जिसमे छोटे बड़े सभी ने आनंद लिया.
फिर वापस ११ बजे भोजन किया , जो की स्वादिस्ट था कारण की हमने रतलाम से किशन जी महाराज को यात्रा में भोजन के लिए नियुक्त किया था.
दोपहर २ बजे हमने  हमारी बसों से तिजारा जी के लिए प्रस्थान कर दिया एवं रास्ते में ही रात्रि के पहले डिनर लिया जो की किशन जी  महाराज हर कदम हमारे साथ चल रहे थे.
फिर रात ८ बजे तिजाराजी पहुँच कर दो बड़े हाल में हम सभी ने आराम किया, फिर मंदिर में आरती कर नए मंदिर के दर्शन के लिए गए जो की रात में  कृतिम रोशनी में खूबसूरत दिख रहा था , हाँ वंहा की पद्मासन मूर्ति बहुत सुंदर थी , और मेरे ख्याल से वर्तमान में सबसे बड़ी पद्मासन मूर्ति यंही पर हे . में यंहा पर    I.S. JAIN का धन्यवाद करूंगा ,जिनके अथक प्रयास एवं तत्परता की वजह से हम यह नजारा देख सके.
फिर वापस धर्मशाला में रात गुजारी एवं  ३० नवम्बर सुबह उठकर स्नान आदि कर  सभी ने मंदिरजी में भागवान जी का अभिषेक किया एवं पूजा अर्चना करने के बाद ९ बजे अल्पाहार लिया.
बाद में सभी ने मार्केट में जाकर शोपिंग की तथा नए मंदिर में वापस जाकर फोटोग्राफी का आनंद लिया जो की रमणीय था.
१२ बजे भोजन लेने के बाद वापस हमें पदमपुरा के लिए प्रस्थान करना था सो हम अपनी तेयारी में जूट गए , और करीब २ बजे हम जयपुर के लिए रवाना हो गए.
हमने रास्ते में ही रात्रि के पहले भोजन लिया एवं ८ बजे हम जयपुर में सांगानेर के प्राचीन मंदिर के दर्शन किये ,आरती की, और वंहा से पदम्पूरा के लिए रावन हो गए.
रात करीबन १० बजे हम पदम् पूरा पहुंचे , सभी यात्री गण को उनके रूम की चाबी देकर हमने मीटिंग की जिसमे सभी मेम्बर एवं उनके परिवार  का परिचय हुआ , सभी यात्री गण का सत्कार किया गया एवं हमारे यात्रा के स्पोंसर का भी सत्कार किया  गया. में धन्यवाद करता हु जयंतिलालजी दोषी दहाणु वाले का जिन्होंने इस मीटिंग की अध्यक्षता ग्रहण की .
रात्रि आराम के बाद ३१ नवेम्बर की सुबह स्नान इत्यादि के बाद  हमने बड़ा वाले बाबा का अभिषेक किया , बाद में पूजा पाठ कर  सभी ने १० बजे ही दाल बाटी का आनंद लिया और ११.३० बजे जयपुर के लिए प्रस्थान कर लिया , जयपुर में हमने पुलक सागरजी महाराज का दर्शन लाभ एवं आशीर्वाद लिया , इसके बाद हमें  जयपुर रेलवे स्टेशन जाना था जंहा हमें २ बजे की जयपुर-मुंबई सुपरफास्ट से वापस मुंबई आना था. करीब १.१५ बजे हम ट्रेन में बेठ गए और इस तरह हम यात्रा की मीठी यादो को अपने मन  में रखते हुए , भगवान का स्मरण कर अपनी तीर्थ यात्रा को हमारे मन मंदिर में बिठाकर , प्रतिज्ञा कर की "अगले साल फिर हम बड़ी यात्रा करेंगे" , और १ दिसम्बर सुबह ७ बजे   मुंबई हमारे  अपने शहर में आगमन किया.
में हमारे सभी यात्री जनों का आभारी ही जिन्होंने  व्यवस्था में कुछ कमिया होने के बावजूद इस यात्रा को यादगार बनाया.
में आभारी हूँ हमारे अध्यक्ष श्री बाबूलालजी का  जिन्होंने मुझे एवं सभी कमिटी मेम्बर्स  को इस काम के लिए प्रेरित किया , 
में आभारी हूँ सभी कमिटी मेम्बेर्स  का जिनके बिना यह यात्रा सफल नहीं हो सकती थी.
में एक बार फिर आपसे वादा कर्ता हूँ की अगले साल इससे भी बड़ी धार्मिक यात्रा का आयोजन होगा , और हम सभी धार्मिक रूप से लाभान्वित होंगे.
मेरी आप सभी से यही विनंती करता हु की धार्मिक यात्रा में बढ चड़कर भाग ले एवं सहयोग करे.
कृपया आपके सुजाव हमें  svdjm.mumbai@gmail.com पर ईमेल  करे.
 
 
जय जिनेन्द्र 
 
 
राजेंद्र आर जैन.
एवं पंकज दोषी