Cancer Cell

यह लेख इन्द्रमल जैन {घाटलिया} जिन्हे I.S.JAIN के नामसे जाना जाता है। I.S.JAIN जो वालकेश्वर बम्बई मे रेहते है उनका पारिवारिक शेयर ब्रोकिन्ग का व्यवसाय ISJ SECURITIES PVT. LTD. के नाम से जाना जाता है एवम मूल निवासी ग्राम पारसोला {राजस्थान} के है! इस लेख का मुख्य उद्देश सभी वागड मंडल के सद्स्यॉ को ब्छम्त जैसी जानलेवा बिमारी के बारे में जागरुकता पैदा करना एवं यदि कोई कॅन्सर से पिडीत है तो उन्है उपचार में सहायता एवं सलाह, मुहैया कराना है! इसी भावना से ने वागड मण्डल के अंतर्गत एक बछम्बत बरस की स्थापना की है! इसकी आवश्यकता का कारण भारतवर्ष में इस बिमारी के बढते आकडे चिंतामय है!

WHAT IS CANCER: It is GENESES MUTATIONS

कॅन्सर या तो कोई ऐसे पदार्थ जो कॅन्सर पैदा करता है के कॉन्टॅक्ट में आनेसे य सेल्स का जिन्स कोड कॉपी करते समय असाधारण रूपसे विभाजित होने से होता है! जब ऐसे पदार्थ को या साधारण सेल्स को शरीर का इम्म्यून सिस्टम नष्ट नही कर पाता तो यह कॅन्सर बन जाता है! नर (Male) एवं मादा (Female) दोनो अनेक प्रकारके कॅन्सर यानी कर्करोग से पिडीत हो सकते है। स्त्रिया अक्सर कॅन्सर के बारे में अनभिज्ञ होती है। स्त्रियों में सामान्यता स्तन (Breast) एवं सर्वाइकल (Cervical) कॅन्सर पाया जाता है। इस लेख के जरिये में स्तन कॅन्सर के बारे में जानकारी देना चाहुंगा। मैं भविष्य में अन्य प्रकार के कॅन्सर अन्य प्रकार के कॅन्सर के बारे में बागड मंडल - कॅन्सर सेल के जरिये जानकारी पहुंचाऊंगा। महानगरों में ब्रेस्ट कॅन्सर के आकडे भयावह प्रस्तुत करते है। स्त्रिया अनभिज्ञतावश, शर्मवश या अन्य कारणवश चेकअप कराने में संकोच करती है। यदी समय रहते बिमारी का Diagnosis हो जावे तो स्तन कॅन्सर का ईलाज संभव है। सबसे ज्यादा परेशानी की बात यह है की नवयुवतीया इसकी सबसे ज्यादा शिकार बन रही है। लगभग २० में से १ स्त्री स्तन कॅन्सर से पिडीत है। डॉक्टर रजनी मुन्तैया-मुख्य अधिकारी, प्रिव्हेन्टीव्ह ओंकोलॉजी - राजीव गांधी कॅन्सर इन्स्टीट्यूट का कहना है की, 'आधे के करीब पिडीत महिलाए फायनल स्टेज पर ईलाज के लिये आती है जब ईलाज हो जाता है।

स्तन कॅन्सर से बचाव

निम्नलिखित ३ कारणोंसे बचना चाहिये -

  1. मॉडर्न लाईफ स्टाईलः डेली मेल लन्दन की एक रिपोर्ट के अनुसार - हमेशा आधे घंटे के Brisk Walk से उनेक प्रकारके कॅन्सरों से बचा जा सकता है। रिसर्चोमें यह पाया गया है की Inactivity एवं Unregulated Cells growth में मजबूत संबंध है। ऍक्टीवीटी नहीं करने से स्त्रीयों में स्तन एवं कॉलॉन कॅन्सर की संभावना बढ जाती है। मोटापा या अधिक वजन वाली महिलाओं को स्तन कॅन्सर की संभावनाए अधिक होती है, व्यायाम व्यक्ती के Immune System को मजबूत करता है एवं शरीर में एस्ट्रोजन लेवल को कम करता है। अधिक एस्ट्रोजन लेवल कॅन्सर का कारण बन सकता है। इसलिए Low Fat Healthy Diet का प्रयोग करना उचित है क्यों की Fat {वसा} एस्ट्रोजन हारमोन को बढाता है जो शरीर में गाठोंको बढावा देती है।
  2. Late Marriage {शादी में देरी}: उच्च एवं उच्चतम शिक्षा तथा केरीयर प्लॅनींग के कारण आजकल नवयुवतीयों की देरीसे शादी होना आम बात है। इससे गर्भधारण प्रर्क्रिया के दौरान उत्पन्न होते है की उत्पत्ती नहीं होने से स्तन कॅन्सर की संभावना बढ जाती है।
  3. Avoiding Breast Feeding {स्तनपान न करना}: फिगर बनाये रखने के चक्कर में आधुनिक महिलाए अपने बच्चे को स्तनपान करानेमें परहेज करती है। कामकाजी महिलाए बच्चोंको बाहरका दुध पिलाती है। यह न केवल बच्चेकी सेहत के लिए गलत है बल्की स्तनपान न कराने के कारण महिलाओंमे स्तन कॅन्सर की संभावना बढ जाती है।

Early Detection Method {समय रहते पता करने के उपाय}

  1. AGE {उम्र}: डॉ. सुरेश अडवाणी मेडिकल ओंकोलॉजिस्ट के अनुसार '४० वर्ष की उम्र के बाद स्त्री में कुछ ऐसे हॉरमोनल परिवर्तन होते है जो महिलओंमे स्तन कॅन्सर की संभावना बढा सकते है'। डॉ. राजन बडवे, डायरेक्टर टाटा मेमोरियल हॉस्पीटल मुंबई का कहना है की 'भारतीय महिलाओंको ५० वर्ष की उम्र के बाद मेमोग्राफी टेस्ट करवाना चाहिये तब तक {५० वर्ष की उम्र से पहले} Physical Examination उत्तम रहेगा।
  2. HIGH RISK GROUP {स्त्रीवर्ग जिन्हे अधिक सतर्क रहना होगा}:
    1. नवयुवतीया जिनके परिवार में दो से अधिक व्यक्तीयोंको स्तन कॅन्सर हो चुका है।
    2. नवयुवतीया जिनका मासीक धर्म (Menstrual Cycle) १२ वर्ष की आयु से पहले हुआ है।
    3. महिलाए जिन्हे ५५ वर्ष की उम्र के बाद मेनोपाज हुआ है।
    4. मोटापा एवं ओवरवेट महिलाए
    5. लेट मॅरेज वाली महिलाए
    6. स्तनपान नहीं करनेवाली महिलाए

DIAGNOSIS METHODS

  1. Self Checkup {स्वयं जांच करे}: 'एक महिला जबतक किसी अंदेशे के बारे में पूर्णतः आश्वस्त नहीं होती तबतक चेकअप के लिये जाना नही चाहती जॉ महिलाए हायरिस्क ग्रुप में है उन्हे जरुरी है की वे रेगुलर सेल्फ चेक अप करे एवं फिर एक्स्पर्ट चेक अप करावाये' द्वारा डॉ. गीता पंड्या गायनोकॉलॉजिस्ट ब्रीच कॅन्डी हॉस्पीटल बम्बई! स्कॅन मेमोग्राफी से शरीर में एक्स रे के द्वार जांच की जाती है पर इससे शरीर के गहराई में छीपी गांठ की जांच नहीं हो पाती। स्क्रीनिंग मेमोग्राफी से शरीर में कॅल्शियम की Tiny Deposits का पता चलता है जो कॅन्सर होने का अंदेशा जताता है।
  2. DIAGNOSTIC MEMMOGRAPHY {डायग्नोस्टीक मेमोग्राफी}: यह एक ४० वर्ष से अधिक उम्र की महिलाओं में स्तन कॅन्सर को पता लगाने का एड्व्हान्स टेस्ट है।

यहाँ मैंने जानबुझकर स्तन कॅन्सर के ईलाज के बारे में जान्कारी नहीं दियी है क्यूंकी मैं यह भावना भाता हूँ की कोई भी नवयुवती/महिला स्तन व किसी भी कॅन्सर क शिकार ना बने!