About Vagad

गुजरात और राजस्थान राज्य की सीमा से लगी हरियाली से भरपूर हमारी आप सभी की मातृभूमि, जन्मभूमि हमारा प्रांत वागड़ जिसका नाम सुनते ही मन प्रफुल्लित हो जाता है | प्रफुल्लित क्योँ न हो हमारे गाँव की मिट्टी की खुशबु है, हमारे स्वजनो की धरती हमारे पूर्वजो की धरती है, हमारे कुल्देवाताओ की धरती है | हमारी अनन्त यादें जहाँ बस्ती है | जिन्हें भुलाना असंभव है |

समय की मांग को देखते हुए आजीविका एवं अपनी तथा परिवारजनो की आवश्यकताओं को पूरा करने तथा नए युग से कदम मिलाकर चलने की इच्छा से अपनी धरती को छोड़कर अन्यत्र जाना पडा आज वागड़ प्रांत के निवासी भारतवर्ष के कोने कोने में बसे हुए है |

इस मायावी नगरी मुम्बई में धनोपार्जित करने के हेतु आये हुए हमारे बंधू-भागीनीओं ने अपने प्रांत-मित्र-सम्बंधीयोँ को अपने पास बुलाकर जरुरी आजीविका के साधन उपलब्ध कराये; तो किसी किसी ने अपने बलबूते पर स्वयं ही अर्जित किये, और आज हमारे प्रांत के करीब करीब मुम्बई में ही ३०० से भी अधिक परिवार अलग अलग जगह पर रहते है | पूर्व में हम सभी आवागमन असुविधा तथा टेलीकोम्युनिकेशन के अभाव से संपर्क हीन रहे, परन्तु आज मोबाईल, टेलीफोन,  टीवी, विडीओ, सीडी, ईमेल वगैरह जैसी आधुनिकतम सुविधाओं के रहते हम एक दुसरे के सम्पर्क कर सकते है | इसी को ध्यान में रखते हुए हमारे प्रियजनोँ, गओंवासियो, सगे सम्बन्धियो तथा समाज बंधुओं के सम्पर्क में रहने, एकजुट रहने, तथा समय समय पर संगठीत हो इसलिए आज से २० साल पहले दि. ६-४-१९८९ को गुडी पाडवा के दिन दो सहयोगीयो से मिलकर मैंने श्री वागड़ दिगम्बर जैन मण्डल की स्थापना की, जो आप सभी को विदीत ही है |

इन २० वर्षों में अनेक बार कई कठिनाईयो का सामना करना पड़ा परन्तु हमारी समाज अनेक कठिनईयो में से उभरकर एकजुट है | समाज के स्नेह सम्मलेन में लगता है मानोँ मुम्बई में पूरा वागड़ प्रांत उभरा हो | मुम्बई में रहकर भी हम हमारे संस्कार को जीवित रखकर वागड़ प्रांत की याद दिलाते है | समाज के साथ चलते चलते मैंने आप सभी से मिलकर कई कार्यक्रमो का सफल आयोजन किया है | और आगे भी समाज के कार्यकर्ता करते रहेंगे | मैं समाज का कृतार्थ हुं कि समाज ने मुझे समय समय पर सेवा का अवसर दिया | इस वर्ष भी समाज ने तृतीय परिवारीक विवरण पुस्तिका प्रकाशन का दायित्व सौपा यह मेरा सौभाग्य है | वागड़ क्षेत्र के ही नहीं अपितु मुम्बई के कई अन्य समाज इस श्री वागड़ दिगम्बर जैन मण्डल, मुम्बई की हमेशा प्रशंसा करते हैं | ध्यान रहे तन-मन-धन तीनो का सुनियोजित संतुलन ही संस्था की सुदृढ़ता है | मेरी अभिलाषा है कि व्यक्ती के मनमें कर्तव्यबोध की भावना जागृत हो और वह समाज सेवा में जैसा भी उससे बन पड़े वह अपना सहयोग देवें | इसी भावना के साथ भविष्य में भी आपके सहयोग एवं आशीर्वाद की कामना करता हुं अस्तुं ...